Gharouni Law Uttar Pradesh | SWAMITVA Yojana 2025

Sarkari Yojana

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By Dheeraj Tiwari

Gharouni Law Uttar Pradesh: गांव जहां पर भारत की आत्मा बसती है! लेकिन आजादी के इतने साल बाद भी गांव के करोड़ों लोगों के पास में अपने ही पक्के घर का कागज नहीं था! ना बैंक से लोन मिल पाता था, ना किसी विवाद में मजबूत सबूत होता था! अब इसी सबसे बड़ी कमी को दूर करने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने विधानसभा से घरौनी कानून को पास कराया है!

Gharouni Law Uttar Pradesh

यह कानून सिर्फ एक दस्तावेज नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और ग्रामीण विकास के लिहाज से एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है! जो कि गांवों को आर्थिक ताकत, कानूनी पहचान और विकास की नई राह देने वाला साबित हो सकता है! लेकिन सवाल यह है कि आखिर घरौनी कानून है क्या? इसे पास कराने की जरूरत क्यों पड़ी और इससे उत्तर प्रदेश के गांवों की जिंदगी जो है वह कैसे बदलने वाली है यह समझते हैं!

क्या है घरौनी कानून?

सबसे पहले क्या है घरौनी कानून? दरअसल उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र 2025 में योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश ग्रामीण आबादी अभिलेख विधेयक 2025 को सदन में पेश किया जिसे बाद में पारित कर दिया गया! आबादी अभिलेख विधेयक 2025 आम भाषा में घरौनी कानून कहा जा रहा है! यह कानून गांवों की आबादी वाली जमीन पर बने घरों के मालिकाना हक को कानूनी मान्यता देता है! अब तक ड्रोन सर्वे के जरिए जो भी घरौनियां दी जा रही थी वे सिर्फ प्रशासनिक दस्तावेज थे! लेकिन इस कानून के लागू होने के बाद से ही घरौनी भी खतौनी की तरह एक वैध कानूनी दस्तावेज बन गई है! इसमें घर के मालिक का नाम, पता, भूखंड का क्षेत्रफल, नक्शा और लोकेशन जैसी पूरी जानकारी दर्ज की जाएगी!

अब गाँव में घर बनाना आसान

इस कानून की जरूरत क्यों पड़ी यह भी समझते हैं! सरकार का यह मानना है कि गांवों में दशकों से सबसे बड़ी समस्या रही है पक्के कागजों की कमी! लोग अपने ही घर में रहते थे, लेकिन उनके पास ऐसा कोई मजबूत दस्तावेज नहीं होता था! जिसके आधार पर वे बैंक से लोन ले सके, बीमा करा सके या फिर किसी कानूनी विवाद में अपनी बात को साबित कर पाए! योगी सरकार ने इसी कमी को दूर करने के लिए घरौनी कानून को आगे बढ़ाया है! ड्रोन सर्वे से घरौनी तो बन गई लेकिन नाम बदलने, विरासत, बिक्री या फिर सुधार की कोई तय प्रक्रिया नहीं थी!

इसी कानूनी खालीपन को भरने के लिए योगी सरकार को यह कानून लाना पड़ा! इस विधेयक को सदन में पेश करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि अब ड्रोन सर्वे से तैयार घरौनी का संरक्षण, अपडेट और कानूनी प्रबंध संभव हो सकेगा! उन्होंने यह भी बताया कि घरौनी बनने के बाद समय के साथ विरासत, उत्तराधिकार, बिक्री या फिर नाम बदलने जैसी जरूरतें आती हैं! लेकिन पहले इसके लिए कोई स्पष्ट नियम नहीं थे! अब इस कानून के जरिए नामांतरण और संशोधन की पूरी प्रक्रिया यहां पर तय कर दी गई है!

ग्रामीणों को अब इससे क्या फायदे होंगे?

योगी सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह होगा! कि अब ग्रामीण अपने घर के दस्तावेज के आधार पर सीधे बैंक से लोन ले सकेंगे! चाहे घर की मरम्मत हो या निर्माण करना हो, छोटा व्यवसाय शुरू करना हो या फिर किसी अन्य जरूरत के लिए आर्थिक मदद चाहिए हो! अब गांवों के लोगों को साहूकारों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे!

बैंक, बीमा और वित्तीय संस्थान घरौनी को एक वैध दस्तावेज के तौर पर स्वीकार करेंगे! घरौनी कानून सिर्फ लोन तक सीमित नहीं है! इसके जरिए गांवों में संपत्ति कर निर्धारण और सही भूमि रिकॉर्ड, जीआईएस आधारित मैपिंग और ग्राम पंचायतों की जो योजनाबद्ध प्लानिंग है, वह भी इससे आसान होगी!

योगी सरकार की बड़ी सौगात

सरकार का यह कहना है कि जब रिकॉर्ड साफ होंगे! तो विकास योजनाओं में पारदर्शिता आएगी और विवाद अपने आप कम हो जाएंगे! उत्तर प्रदेश में बता दें कि 1,10,000 से ज्यादा गांव इस योजना के दायरे में हैं! मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच हुए एमओयू के तहत प्रदेश के 110344 गांव इस योजना में शामिल किए गए हैं!

गैर आबाद गांवों को छोड़कर 90573 गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है! और 9 मई 2025 तक 1 करोड़ 6 लाख से ज्यादा घरौनियां तैयार की गई है! जिनमें से 1 करोड़ 1 लाख से अधिक घरौनियों का जो वितरण है! वह ग्रामीणों को किया जा चुका है!

Property Ownership

अब घरौनी कानून में यह भी साफ किया गया है! कि ग्रामीण आबादी का अभिलेख घरौनी कहलाएगा! इसमें मालिक का जो नाम है, पता है, भूखंड का वितरण, क्षेत्रफल, रेखा चित्र और स्थानीय जानकारी सभी चीजें दर्ज होंगी! किसी गांव की सभी घरौनियों को मिलाकर घर रजिस्टर बनेगा और एक अलग आबादी मानचित्र भी तैयार किया जाएगा!

हर जिले में जिलाधारी को अभिलेख अधिकारी नामित किया जाएगा! ताकि जो रिकॉर्ड है उसकी जिम्मेदारी वह अधिकारी तय कर सके!योगी सरकार का यह दावा है! कि इस कानून के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति विवादों में भारी कमी आ जाएगी! अवैध कब्जों पर रोक लग जाएगी! रिकॉर्ड पारदर्शी होंगे और गांवों का जो विकास है वह योजनाबद्ध तरीके से हो सकेगा! सरकार इसे ग्रामीण भारत के लिए आर्थिक और सामाजिक बदलाव का आधार मान रही है!

यह भी देखें: https://vlesociety.com/up-panchayat-chunav-draft-list-me-name-kaise-add-kare-how-to-add-name-in-draft-voter-list-online-2026/

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