UGC Act 2026: विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को लेकर बहस तेज है! यूनिवर्सिटी ग्रैंड कमीशन ने एक गाइडलाइन जारी की थी जिसके तहत देश के सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने यहां इक्विटी कमेटी बनानी थी!
इस कमेटी का काम था कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अन्य वर्गों के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के भेदभाव की शिकायतों को सुना जाए और तय समय सीमा के अंदर उनका समाधान किया जाए!
UGC Act 2026
यूजीसी का कहना है कि यह कदम शिक्षा संस्थानों में समानता, न्याय सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया! लेकिन इस फैसले के बाद देश के कुछ हिस्सों में विरोध भी देखने को मिला! खासतौर पर सवर्ण समाज से जुड़े संगठनों और समूहों ने इस नियम को लेकर सवाल उठाए और प्रदर्शन भी किए! इस बीच यह सवाल भी उठ रहा है! कि आखिर इस नियम को बनाने की सिफारिश किसने की और उस समिति में कौन-कौन शामिल था?
कमेटी में कौन-कौन शामिल था?
यूजीसी की इस गाइडलाइन के पीछे जिस संसदीय समिति की सिफारिशें थी! उसका नेतृत्व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह कर रहे थे! यह समिति संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनी थी। इसमें कुल 31 सदस्य शामिल थे!
इस समिति में केवल एक ही पार्टी के नेता नहीं थे! बल्कि लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि इसमें शामिल थे! यानी यह फैसला किसी एक दल का नहीं बल्कि बहुदलीय प्रक्रिया के तहत तैयार की गई सिफारिशों का परिणाम था!
UGC Act 2026 In Hindi
राज्यसभा से समिति में कई प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया था! दिग्विजय सिंह के अलावा भाजपा नेता भीम सिंह, घनश्याम तिवारी, रेखा शर्मा, सी सदानानंद, मास्टर और सिकंदर कुमार जैसे नाम शामिल थे!
इसके साथ ही सीपीएम के विकास रंजन भट्टाचार्य, एनसीपी की सुनीत्रा पवार, आम आदमी पार्टी की स्वाति मालीवाल, कांग्रेस की सुष्मिता देव भी समिति का हिस्सा थी!
लोकसभा से बड़ी संख्या में सांसद इस समिति में शामिल थे।
भाजपा से अभिजीत गंगोपाध्याय रविशंकर प्रसाद संबित पात्रा बांसुरी स्वराज बृजमोहन अग्रवाल दगुबाती पुरदेश्वरी दर्शन सिंह चौधरी हेमांग जोशी कामाख्या प्रसाद तासा करण भूषण सिंह और शोभना बेन महेंद्र सिंह बरिया जैसे नेता इसमें शामिल थे!
कांग्रेस से डीएन कुरिया कोसे वर्षा गायकवाड़ और अंगोमचा बिमोल अकोई जाम समिति के सदस्य थे! समाजवादी पार्टी से राजीव राय, जियाउर रहमान बर्ग और जितेंद्र कुमार धोरे शामिल थे! तृणमूल कांग्रेस से रचना बनर्जी, कालीपाड़ा, सरेन खेरवाल और डीएमके से थमी झाची, थंगा पडियन भी इस समिति का हिस्सा थी! एनसीपी शरद पवार गुड से अमर शरदराव काले भी समिति में शामिल थे!
UGC किस कमेटी ने की थी UGC रूल्स की सिफारिश
अगर राजनीतिक आंकड़ों की बात करें तो इस समिति में भाजपा सांसदों की संख्या सबसे ज्यादा थी! कुल सदस्यों में भाजपा के सांसदों की हिस्सेदारी 50% से अधिक थी। यह समिति पूरी तरह से बहुदलीय थी! और इसमें कांग्रेस, सपा, टीएमसी, डीएमके, सीपीएम, एनसीपी और आम आदमी पार्टी से जुड़े नेता भी शामिल थे!
यूजीसी के नए नियम सामने आने के बाद विवाद इसलिए बढ़ गया क्योंकि कुछ वर्गों को लगा कि यह नियम सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है और वहीं दूसरी ओर कई शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों का कहना है! कि शिक्षा संस्थानों में भेदभाव की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही है! और ऐसे में एक औपचारिक व्यवस्था जरूरी थी! इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी अहम सुनवाई हुई है। यूजीसी रेगुलेशन के खिलाफ देश भर में भारी विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई!
मामले की अगली सुनवाई अब 19 मार्च को
सुप्रीम कोर्ट ने जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा से संबंधित यूजीसी रेगुलेशन के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की! सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों पर रोक लगा दी! अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी! यूजीसी रेगुलेशन के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम सिर्फ संवैधानिकता और वैधता के आधार पर इसकी जांच कर रहे हैं!
यूजीसी रेगुलेशन के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में भारत की एकता दिखनी चाहिए! चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोमाल्या बागची की बेंच ने यूजीसी के नए नियमों पर सुनवाई करते हुए कहा! कि यूजीसी के नए नियम अस्पष्ट है और इसके दुरुपयोग का खतरा है! इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों पर रोक लगा दी है! मामले की अगली सुनवाई अब 19 मार्च को की जाएगी!
यह भी देखें: https://vlesociety.com/bihar-panchayati-raj-vacancy-2026-